कहा कि हर नारी के भीतर अहिल्याबाई, माता सीता, द्रौपदी और जीजाबाई जैसे आदर्शों से प्रेरणा लेने की क्षमता है. घरों में रामायण, भागवत और नियमित स्वाध्याय का वातावरण बने, तो नई पीढ़ी में विवेक, साहस और संस्कार विकसित हो सकते हैं.
- शांतिकुंज हरिद्वार की टोली ने महिलाओं को रूढ़िवादिता और अंधविश्वास से बाहर निकलकर समाज निर्माण में भागीदारी का दिया संदेश.
- हरिद्वार की भजन मंडली की प्रस्तुति से गूंजा सभागार, कई जिलों और राज्यों से पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं.
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नारी में आत्मबल जागे, संस्कार मजबूत हों और समाज निर्माण में उसकी भागीदारी बढ़े, तो परिवार से लेकर राष्ट्र तक की तस्वीर बदल सकती है. इसी संदेश के साथ बुधवार को बक्सर में अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से एक दिवसीय नारी जागरण सम्मेलन आयोजित किया गया. माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष और त्रिवेणी जन्म शताब्दी अभियान के तहत भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कंचन देवी के निजी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शांतिकुंज हरिद्वार की मुख्य वक्ता शोभा देवी ने महिलाओं को आत्मबल, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाया. कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त निहारिका छवि भी पहुंची. सम्मेलन में बक्सर सहित आसपास के कई जिलों और सीमावर्ती राज्यों से सैकड़ों महिलाएं शामिल हुईं.
नारी के भीतर छिपी है नेतृत्व और बदलाव की शक्ति
शांतिकुंज हरिद्वार से पहुंचीं शोभा देवी ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा के जन्म के 100 वर्ष पूरे होने के साथ अखंड दीपक, अखंड ज्योति पत्रिका और परम पूज्य गुरुदेव की साधना के भी 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस अवसर पर देशभर में नारी जागरण अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य महिलाओं को पर्दा प्रथा, रूढ़िवादिता और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों से बाहर निकालकर समाज के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ाना है.
उन्होंने कहा कि हर नारी के भीतर अहिल्याबाई, माता सीता, द्रौपदी और जीजाबाई जैसे आदर्शों से प्रेरणा लेने की क्षमता है. घरों में रामायण, भागवत और नियमित स्वाध्याय का वातावरण बने, तो नई पीढ़ी में विवेक, साहस और संस्कार विकसित हो सकते हैं. उन्होंने आंतरिक शांति और आत्मबल के लिए गायत्री मंत्र की नियमित साधना पर भी जोर दिया.
कंचन देवी और भारती जायसवाल ने भी रखे विचार
भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कंचन देवी ने कहा कि नारी समाज की रीढ़ है. जब महिलाएं जागरूक और सशक्त होती हैं, तो परिवार और राष्ट्र भी मजबूत बनते हैं. उन्होंने कहा कि आज की नारी के लिए आत्मनिर्भर बनने के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और नैतिक मूल्यों से जुड़े रहना भी जरूरी है. ऐसे आयोजन महिलाओं में आत्मसम्मान, संगठन क्षमता और नेतृत्व के गुण विकसित करने में मदद करते हैं.
वहीं, भगवती महिला मंडल की संचालिका और गायत्री शक्तिपीठ की ट्रस्टी भारती जायसवाल ने कहा कि महिलाएं घर-परिवार की कई जिम्मेदारियां निभाती हैं, लेकिन कई बार अपने जीवन के मूल उद्देश्य से दूर हो जाती हैं. नारी जागरण अभियान महिलाओं को अपने विवेक और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का प्रयास है.
कार्यक्रम में हरिद्वार से आई भजन मंडली ने प्रेरणादायी भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे पूरा सभागार भक्तिमय हो गया. सम्मेलन के समापन पर महिलाओं ने समाजोत्थान, कुरीतियों के उन्मूलन और संस्कारों के संवर्धन के लिए काम करने का संकल्प लिया.






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