बक्सर में मूर्ति विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब कहां? छठिया पोखरा में विसर्जन की नौबत पर उठे सवाल ..

जिला पदाधिकारी से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के पर्यावरणीय निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, लेकिन विसर्जन के लिए पर्याप्त कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ रही है.




                           



  • प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रशासन से पहल की मांग
  • पूजा समितियों को समय रहते व्यवस्था बताने की अपील

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : दुर्गा पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन को लेकर बक्सर जिले में कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था का मुद्दा उठने लगा है. सामाजिक मंच के संयोजक और सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी के पूर्व प्रत्याशी प्रदीप कुमार शरण ने जिला पदाधिकारी से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के पर्यावरणीय निर्देशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं, लेकिन विसर्जन के लिए पर्याप्त कृत्रिम तालाबों की व्यवस्था स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ रही है.

छठिया पोखरा में विसर्जन की स्थिति का दिया हवाला

प्रदीप कुमार शरण ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए मूर्तियों का विसर्जन निर्धारित कृत्रिम तालाबों में कराया जाना चाहिए. नदियों, पोखरों और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में मूर्ति विसर्जन पर रोक संबंधी निर्देशों का पालन जरूरी है. उन्होंने दावा किया कि बक्सर जिले में पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक कृत्रिम तालाबों के निर्माण की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है. उनके मुताबिक, पहले भी ऐसी अव्यवस्था के कारण डुमरांव के महत्वपूर्ण छठिया पोखरा में मूर्ति विसर्जन की स्थिति उत्पन्न हुई थी.

मूर्तियों की संख्या के अनुसार बने कृत्रिम तालाब

शरण ने जिला प्रशासन से नगर विकास एवं आवास विभाग और संबंधित विभागों के माध्यम से कृत्रिम तालाबों के निर्माण के लिए प्राक्कलन तैयार कराने तथा नियमानुसार निर्माण कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि जिले में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं की संख्या और जरूरत को ध्यान में रखकर पर्याप्त कृत्रिम तालाब बनाए जाने चाहिए. साथ ही, सभी दुर्गा पूजा समितियों को समय रहते विसर्जन की निर्धारित व्यवस्था की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि अंतिम समय में श्रद्धालुओं और आयोजकों को परेशानी न हो.

उन्होंने जिला पदाधिकारी से इस मामले में त्वरित पहल करने और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने की अपील की. शरण ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज, दोनों की जिम्मेदारी है. स्वच्छ विसर्जन से प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के साथ धार्मिक परंपराओं का निर्वहन भी व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है.













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