सिविल सर्जन कार्यालय में भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है. ऐसे में इन जगहों पर आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर आग बुझाने और दवाओं व जरूरी सामान को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है.
- तीन मंजिला अस्पताल में फिक्स्ड फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं, एसएनसीयू समेत पूरे परिसर में महज 23 छोटे सिलेंडर
- दवा भंडार और सिविल सर्जन कार्यालय में भी अग्निशमन सिलेंडर नहीं होने की बात, अस्पताल प्रबंधक ने जल्द व्यवस्था दुरुस्त करने का दिया भरोसा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : अस्पताल का काम मरीजों की जिंदगी बचाना है, लेकिन अगर इसी अस्पताल में आग लग जाए तो मरीजों की सुरक्षा कैसे होगी? बक्सर सदर अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था की मौजूदा स्थिति ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. ग्राउंड फ्लोर के अलावा तीन अन्य तलों वाले अस्पताल में आग बुझाने के लिए फिक्स्ड फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं होने की बात सामने आई है. पूरे अस्पताल में शिशु गहन चिकित्सा केंद्र (एसएनसीयू) समेत महज 23 छोटे अग्निशमन सिलेंडर होने की जानकारी मिली है. वहीं, दवा भंडारण कक्ष और सिविल सर्जन कार्यालय में भी अग्निशमन सिलेंडर नहीं होने की बात कही गई है. ऐसे में आग लगने की स्थिति में मरीजों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
शॉर्ट सर्किट की घटनाएं, छोटे सिलेंडरों के भरोसे आग पर काबू
अस्पताल के कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि शॉर्ट सर्किट से आग लगने की छोटी-मोटी घटनाएं सामने आती रहती हैं. हालांकि, समय रहते छोटे सिलेंडरों की मदद से आग बुझा दी जाती है. कर्मियों के अनुसार, यदि आग बड़े स्तर पर फैल गई तो मौजूदा संसाधनों से उस पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है.
अस्पताल के प्रत्येक तल पर करीब 400 मरीजों के रहने की व्यवस्था बताई गई है. ऐसे में आग लगने पर गंभीर मरीजों, बच्चों, बुजुर्गों और खुद चलकर बाहर नहीं निकल सकने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है. धुएं की निकासी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने की बात भी सामने आई है. अस्पताल में सामने की ओर दो और पीछे की तरफ एक प्रवेश द्वार है, लेकिन आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी, यह सवाल बना हुआ है.
दवा भंडार में भी सुरक्षा इंतजाम पर सवाल
अस्पताल के दवा भंडारण कक्ष में अग्निशमन सिलेंडर नहीं होने की बात सामने आई है. सिविल सर्जन कार्यालय में भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है. ऐसे में इन जगहों पर आग लगने की स्थिति में शुरुआती स्तर पर आग बुझाने और दवाओं व जरूरी सामान को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है.
देश के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं के मद्देनजर सदर अस्पताल में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता, नियमित फायर ऑडिट, धुएं की निकासी और आपातकालीन निकास व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है. निजी अस्पतालों में भी नियमित फायर ऑडिट सुनिश्चित करने की आवश्यकता है.
रोगी कल्याण समिति की बैठक में उठा था मामला
रोगी कल्याण समिति के सदस्य और प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. राजेश मिश्र ने अस्पताल में अग्निशमन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि हाल ही में रोगी कल्याण समिति की बैठक में डीडीसी निहारिका छवि के समक्ष यह मुद्दा उठाया गया था. उस दौरान जल्द ही व्यवस्था दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया गया था.
कहते हैं अधिकारी
सदर अस्पताल के प्रबंधक दुष्यंत कुमार सिंह ने बताया कि मुख्य सचिव के निर्देश पर अस्पताल में जल्द ही पर्याप्त फायर फाइटिंग व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में आवश्यक जानकारी पत्र के माध्यम से सिविल सर्जन और उनके स्तर से राज्य स्वास्थ्य समिति को भेजी जा चुकी है. जल्द ही अग्निशमन व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी.






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