मां को विदाई देते श्रद्धालुओं के बीच भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला. 109 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी बक्सर की धार्मिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता को जीवंत बनाए हुए है.

- महिलाओं ने मां की गोद भरकर मांगी सुख-समृद्धि की कामना, ‘मां अगले बरस फिर जल्दी आना’ के जयकारों से भावुक हुआ माहौल
- पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा में दिखी आस्था और सामाजिक एकजुटता की झलक
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शारदीय नवरात्र के बाद मां दुर्गा की विदाई का पल श्रद्धा और भावनाओं से भर गया. शहर के श्री चंद्र मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा को श्रद्धालुओं ने खोइंचा भरकर नम आंखों से विदाई दी. विदाई के दौरान महिलाओं और भक्तों ने मां से सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की. मां के जयकारों के बीच माहौल ऐसा हो गया कि श्रद्धालु भावुक हो उठे और सभी की जुबां पर एक ही पुकार थी—‘मां, अगले बरस फिर जल्दी आना.’
109 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा
श्री चंद्र मंदिर में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और विदाई की परंपरा पिछले 109 वर्षों से निभाई जा रही है. पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा से मुहल्लेवासियों की धार्मिक आस्था और आपसी जुड़ाव की झलक मिलती है. हर साल मां की विदाई के इस अवसर पर श्रद्धालु पूरे भाव के साथ शामिल होते हैं और मां से अपने परिवार तथा समाज की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं.
खोइंचा भरकर मां से मांगी सुख-समृद्धि
मां की विदाई के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार खोइंचा भरकर उन्हें विदा किया. श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि मां के प्रति प्रेम, विश्वास और आत्मीयता से जुड़ा अवसर है. भक्तों ने प्रार्थना की कि मां सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और अगले वर्ष फिर आगमन कर दर्शन देने आएं.
नम आंखों और भारी मन से मां को विदाई देते श्रद्धालुओं के बीच भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला. 109 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी बक्सर की धार्मिक विरासत और सामुदायिक एकजुटता को जीवंत बनाए हुए है.





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