यात्रा के माध्यम से लोगों को प्रकृति के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया. अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ना है.

- पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व में जनकपुर से शुरू हुई यात्रा, जल-जंगल-जमीन और जैव विविधता बचाने का दिया संदेश
- पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की अपील, पंकज मालवीय ने कहा- यह यात्रा नहीं, प्रकृति बचाने के संकल्प को आगे बढ़ाने की पहल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : प्रकृति संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने और पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का भाव जगाने के उद्देश्य से निकली साइकिल यात्रा बिहार के अपने सफर को बक्सर में पूरा कर रही है. ‘प्रकृति ही प्रभु है’ के संदेश के साथ 2 अक्टूबर को नेपाल के जनकपुर से शुरु हुई यह यात्रा 22 अक्टूबर को बक्सर से उत्तर प्रदेश के बलिया के लिए रवाना होगी. पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के नेतृत्व और सामाजिक कार्यकर्ता पंकज मालवीय की सहभागिता में निकली यह यात्रा जल, जंगल, जमीन और जैव विविधता के संरक्षण का संदेश दे रही है.
बिहार और झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरने के दौरान यात्रा के माध्यम से लोगों को प्रकृति के महत्व और उसके संरक्षण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया. अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को केवल चर्चा तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ना है.
प्रकृति संरक्षण के संकल्प को नई ऊर्जा देने की पहल
पर्यावरण कार्यकर्ता पंकज मालवीय ने साइकिल यात्रा को विदाई देते हुए कहा कि बिहार की ऐतिहासिक धरती, ज्ञान, संस्कृति और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि से इस यात्रा को आगे बढ़ाना गौरव की बात है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक यात्रा को विदाई देना नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के विचार, संकल्प और जन-आंदोलन को नई ऊर्जा देने की पहल है.
अर्थव्यवस्था और मानव जीवन से जुड़ा है पर्यावरण संरक्षण
पंकज मालवीय ने कहा कि पद्मश्री एवं पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का प्रकृति, हिमालय, जल और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के क्षेत्र में दीर्घकालीन योगदान प्रेरणास्रोत है. उनके विचारों और कार्यों ने समाज को यह समझाने का प्रयास किया है कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरण तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध अर्थव्यवस्था, समाज, संस्कृति और मानव जीवन के भविष्य से भी है.
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस यात्रा के जरिए लोगों को प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक होने और अपनी जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिलेगी. बक्सर से बलिया की ओर बढ़ने वाली यह यात्रा पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आगे पहुंचाएगी.
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