कहा कि बक्सर को भगवान श्रीराम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यहां के प्राचीन इतिहास से जुड़े दूसरे पात्रों और स्थलों को भी विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए. उनके अनुसार, महारानी ताड़का की स्मृति से जुड़ी पहचान विकसित करने की दिशा में पहल होनी चाहिए.

- सिद्धाश्रम में ताड़का की स्मृति को संजोने की पहल का किया स्वागत, नई पीढ़ी को प्राचीन इतिहास से परिचित कराने पर दिया जोर
- अशोक विजयदशमी पर बुद्ध और बाबा साहेब को किया याद, युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की जताई उम्मीद
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : भगवान श्रीराम और सिद्धाश्रम की पहचान रखने वाले बक्सर के प्राचीन इतिहास में महारानी ताड़का की स्मृति को भी उचित स्थान मिलना चाहिए. यह कहना है बीएस फोर से जुड़े अनिल कुमार का. उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान जय हिंद क्लब की ओर से सिद्धाश्रम में महारानी ताड़का की स्मृति और उनसे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को सामने लाने की पहल का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि बक्सर की ऐतिहासिक पहचान को व्यापक रूप से सामने लाने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं.
अनिल कुमार ने जय हिंद क्लब की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह क्लब नगर में कुछ नया और सकारात्मक करने का प्रयास करता रहा है. दुर्गा पूजा के दौरान विभिन्न स्थानों पर पंडाल और भंडारे आयोजित किए जाते हैं, लेकिन सिद्धाश्रम में महारानी ताड़का की स्मृति को महत्व देना बक्सर के इतिहास को नए नजरिए से देखने का अवसर प्रदान करता है.
उन्होंने कहा कि बक्सर को भगवान श्रीराम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यहां के प्राचीन इतिहास से जुड़े दूसरे पात्रों और स्थलों को भी विस्मृत नहीं किया जाना चाहिए. उनके अनुसार, महारानी ताड़का की स्मृति से जुड़ी पहचान विकसित करने की दिशा में पहल होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने क्षेत्र के ऐतिहासिक संदर्भों को बेहतर ढंग से समझ सके.
ताड़का के किले की खुदाई से सामने आ सकता है इतिहास
बक्सर में अतिथि गृह के पास वर्ष 1990 के आसपास किले जैसी संरचना मिलने के संदर्भ में अनिल कुमार ने दोबारा खुदाई कराने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि यदि इस स्थल की ऐतिहासिक पहचान और महत्व की जांच कराई जाए, तो प्राचीन बक्सर के इतिहास और तत्कालीन राजव्यवस्था से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इस संरचना की वास्तविक पहचान और महारानी ताड़का से इसके संबंध की पुष्टि के लिए पुरातात्विक जांच जरूरी है.
उन्होंने जोर दिया कि बक्सर के बच्चों और युवाओं को अपने क्षेत्र की प्राचीन विरासत के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए. ऐतिहासिक स्थलों की पहचान, संरक्षण और शोध से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा.
अशोक विजयदशमी पर बुद्ध और बाबा साहेब को किया याद
अनिल कुमार ने अशोक विजयदशमी और बौद्ध परंपरा के महत्व का भी उल्लेख किया. उन्होंने सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध के बाद हिंसा त्यागकर बौद्ध धम्म की ओर अग्रसर होने के प्रसंग को याद किया. साथ ही, डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बौद्ध धम्म की दीक्षा लेने के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया.
अंत में उन्होंने बक्सर की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि नगर में विकास के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने चाहिए. युवाओं और महिलाओं को बेहतर रोजगार मिले तथा बक्सर लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़े, यही उनकी कामना है. मौके पर वार्ड पार्षद चक्रवर्ती चौधरी के साथ-साथ अभिमन्यु कुशवाहा व अन्य नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
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