कहा कि उन्होंने इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज स्वयं नहीं देखा है. हालांकि, पत्रकारों और स्थानीय लोगों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि शैलेश नगर परिषद में विधायक प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे थे.

- साइबर ठगी मामले में पकड़े गए शैलेश मिश्रा को बताया बलि का बकरा, निष्पक्ष जांच की मांग की
- पुराने फर्जी सोना खरीद मामले में स्वर्ण व्यवसायियों की पैरवी का किया जिक्र, रोजगार के दावों पर भी उठाए सवाल
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पूर्व सदर विधायक संजय कुमार उर्फ मुन्ना तिवारी ने साइबर ठगी मामले में पकड़े गए शैलेश कुमार मिश्रा को लेकर बयान देते हुए सदर विधायक आनंद मिश्र पर निशाना साधा है. उन्होंने शैलेश को बलि का बकरा बनाए जाने की बात कही और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की. साथ ही उन्होंने जनप्रतिनिधि की भूमिका, जनता के बीच उनकी उपलब्धता और युवाओं को रोजगार देने के दावों पर सवाल उठाए. उनके बयान में पुराने फर्जी सोना खरीद मामले का भी जिक्र आया, जिसमें पहले कुछ स्वर्ण व्यवसायी पकड़े गए थे और उस समय उन्होंने उनके पक्ष में पैरवी की थी.
पुराने मामले में स्वर्ण व्यवसायियों की पैरवी का किया जिक्र
मुन्ना तिवारी ने अपने बयान में बताया कि पहले जब बक्सर के कुछ प्रतिष्ठित स्वर्ण व्यवसायियों पर फर्जी या चोरी का सोना खरीदने के आरोप लगे थे, तब उन्होंने तत्कालीन एसपी उपेंद्र वर्मा के सामने व्यवसायियों का पक्ष रखा था. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है कि वह जनता की समस्याओं और उसकी बातों को प्रशासन के सामने रखे. उनके मुताबिक, उस समय महाराष्ट्र और गुजरात पुलिस की जांच के दौरान व्यवसायियों को राहत दिलाने के लिए उन्होंने हस्तक्षेप किया था.
यह मामला शैलेश कुमार मिश्रा की गिरफ्तारी से अलग है. शैलेश मिश्रा साइबर ठगी के मामले में पकड़े गए हैं. मुन्ना तिवारी ने पुराने प्रकरण का उल्लेख करते हुए जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी भूमिका का उदाहरण दिया और मौजूदा मामले में भी निष्पक्ष जांच की जरूरत बताई.
शैलेश मिश्रा और कमल सेवा केंद्र को लेकर उठाए सवाल
हालिया साइबर ठगी मामले पर बोलते हुए मुन्ना तिवारी ने शैलेश मिश्रा को बलि का बकरा बनाए जाने का दावा किया. उन्होंने मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच किए जाने की बात कही. उनके बयान में कमल सेवा केंद्र और उसके संचालक का उल्लेख भी आया. उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं को गुमराह कर उनका इस्तेमाल किया गया है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में पुलिस की जांच तथा संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा.
शैलेश मिश्रा के सदर विधायक आनंद मिश्र का प्रतिनिधि होने के सवाल पर पूर्व विधायक ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज स्वयं नहीं देखा है. हालांकि, पत्रकारों और स्थानीय लोगों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली है कि शैलेश नगर परिषद में विधायक प्रतिनिधि के तौर पर काम कर रहे थे. इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है.
बोले- जनप्रतिनिधि वही, जो 24 घंटे जनता के बीच रहे
दुर्गापूजा के दौरान पूजा पंडालों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी और सदर विधायक की क्षेत्र में सक्रियता को लेकर पूछे गए सवाल पर मुन्ना तिवारी ने कहा कि जनप्रतिनिधि वही है, जो 24 घंटे और सातों दिन जनता के बीच उपलब्ध रहे. उन्होंने पुलिस सेवा की पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की और जनप्रतिनिधि के तौर पर जनता से जुड़ाव को महत्वपूर्ण बताया.
रोजगार देने के दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं से बातचीत करने पर वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के युवा, महिलाएं, बुजुर्ग, किसान और व्यापारी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है.
बिहार में अपनी पहचान का भी किया जिक्र
अपने राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए मुन्ना तिवारी ने कहा कि शाहाबाद ही नहीं, पूरा बिहार उनके नाम से परिचित है. उन्होंने दावा किया कि लोग उनसे मिलकर मौजूदा जनप्रतिनिधि के चयन को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. यह उनकी ओर से किया गया राजनीतिक दावा है.
फिलहाल, शैलेश मिश्रा से जुड़े साइबर ठगी मामले में उनकी भूमिका, विधायक प्रतिनिधि होने के दावे और अन्य लोगों पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस की जांच तथा आधिकारिक दस्तावेजों से ही हो सकेगी. मामले में सदर विधायक आनंद मिश्र का पक्ष ज्ञात नहीं हो सका. संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.





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