स्मारिका’ का प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब ने विमोचन किया. इस मौके पर जिले के कई न्यायिक पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता और सैकड़ों विधिज्ञ मौजूद रहे.
- प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब ने किया ‘बक्सर टुडे स्मृति स्मारिका’ का लोकार्पण
- अधिवक्ता सह साहित्यकार रामेश्वर प्रसाद वर्मा के संपादन में प्रकाशित स्मारिका में सहेजी गई बक्सर की बौद्धिक और साहित्यिक विरासत
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : अदालतों में जहां कानून की से न्याय की राह निकलती है, वहीं साहित्य समाज को सोचने और समझने की नई दृष्टि देता है. जब न्याय और साहित्य एक मंच पर आए, तो बक्सर में एक खास आयोजन का साक्षी बना पुस्तकालय भवन. यहां जिला अधिवक्ता संघ के सानिध्य में प्रकाशित ‘बक्सर टुडे स्मृति स्मारिका’ का प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब ने विमोचन किया. इस मौके पर जिले के कई न्यायिक पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता और सैकड़ों विधिज्ञ मौजूद रहे. आयोजन में न्यायिक गरिमा के साथ साहित्यिक चेतना और बौद्धिक परंपरा की झलक देखने को मिली.
कानून की दुनिया से साहित्य के पन्नों तक
‘बक्सर टुडे स्मृति स्मारिका’ का संपादन अधिवक्ता एवं साहित्यकार रामेश्वर प्रसाद वर्मा ने किया है. विधिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ साहित्य के प्रति उनकी रुचि और सृजनात्मक प्रतिबद्धता इस प्रकाशन को खास बनाती है. स्मारिका के जरिए बक्सर के साहित्यिक परिवेश, वैचारिक परंपराओं और विधिक जगत से जुड़े विचारों को संजोने का प्रयास किया गया है.
विमोचन के दौरान यह संदेश भी सामने आया कि अधिवक्ताओं की भूमिका केवल अदालतों में कानूनी पक्ष रखने तक सीमित नहीं है. समाज में जागरूकता बढ़ाने, मानवीय मूल्यों को मजबूती देने और विचारों की स्वस्थ परंपरा विकसित करने में भी उनकी अहम भूमिका होती है. साहित्य इस दायित्व को व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करता है.
न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं की रही मौजूदगी
समारोह में प्रधान न्यायाधीश मनोज कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम उदय प्रताप सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय महेंद्र कुमार शुक्ला, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय सुदेश श्रीवास्तव, एसीजेएम प्रथम गौरी शंकर, एसीजेएम पंचम सुधांशु पाण्डेय और एसीजेएम तृतीय महेंद्र नाथ पाण्डेय सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे.
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष बबन ओझा और महासचिव विनंदेश्वरी प्रसाद पाण्डेय भी समारोह में शामिल हुए. वरिष्ठ अधिवक्ता कृपाशंकर राय, जनार्दन राय, रामकृष्ण चौबे, शशिकांत उपाध्याय और अविनाश यादव समेत सैकड़ों अधिवक्ताओं की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक स्वरूप दिया.
आने वाली पीढ़ियों के लिए यादों और विचारों का दस्तावेज
स्मृति स्मारिकाएं केवल बीते आयोजनों या व्यक्तित्वों का उल्लेख करने तक सीमित नहीं होतीं. वे अपने समय की उपलब्धियों, विचारों और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को दर्ज कर भविष्य के लिए दस्तावेज तैयार करती हैं. इनके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को अपने समाज की बौद्धिक विरासत को समझने का अवसर मिलता है.
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान रखने वाले बक्सर में इस तरह की पहल साहित्य, शिक्षा और सामाजिक चेतना की परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम बन सकती है. न्याय व्यवस्था जहां अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करती है, वहीं साहित्य समाज को संवेदनशील बनाने और विचारों को नई दिशा देने का काम करता है.
‘बक्सर टुडे स्मृति स्मारिका’ का विमोचन इसी साझा महत्व को रेखांकित करने वाला आयोजन रहा. जिला अधिवक्ता संघ के सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम ने न्यायिक जगत और साहित्यिक अभिरुचि के बीच संवाद की संभावनाओं को सामने रखा.





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