सूचना मिलते ही रेल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. हरिओम पाठक अपनी टीम के साथ पहुंचे और सुरक्षित प्रसव कराकर मां और नवजात को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी. रेलवे चिकित्सकों की तत्परता से ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के बीच भी राहत और खुशी का माहौल बन गया.

- अहमदाबाद-बरौनी एक्सप्रेस के एस-2 कोच में मची हलचल, सूचना मिलते ही टीम के साथ पहुंचे रेल चिकित्सक डॉ. हरिओम पाठक
- स्टेशन पर आधे घंटे रुकवाई गई ट्रेन, इलाज के बाद महिला ने पति के साथ गांव जाने की जताई इच्छा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : महाअष्टमी के पावन दिन अहमदाबाद-बरौनी एक्सप्रेस में उस समय खुशियों की किलकारी गूंज उठी, जब दशहरे पर अपने गांव लौट रही एक महिला ने ट्रेन की बोगी में स्वस्थ शिशु को जन्म दिया. बक्सर रेलवे स्टेशन पर सूचना मिलते ही रेल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. हरिओम पाठक अपनी टीम के साथ पहुंचे और सुरक्षित प्रसव कराकर मां और नवजात को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता दी. रेलवे चिकित्सकों की तत्परता से ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के बीच भी राहत और खुशी का माहौल बन गया.
घटना गाड़ी संख्या 19483 अहमदाबाद-बरौनी एक्सप्रेस की है. सूरत की एक कपड़ा फैक्ट्री में नौकरी करने वाले एक व्यक्ति अपनी 25 वर्षीय पत्नी के साथ दशहरे पर गांव लौट रहे थे. दोनों ट्रेन के एस-2 कोच में सफर कर रहे थे. डीडीयू स्टेशन से ट्रेन खुलने के बाद सूचना मिली कि महिला को प्रसव पीड़ा हो रही है. इसके बाद बक्सर रेलवे स्टेशन के स्टेशन प्रबंधक रजत सक्सेना ने तत्काल चिकित्सकीय सहायता की व्यवस्था की.
सूचना मिलते ही अलर्ट हुई मेडिकल टीम
ट्रेन दिन में करीब 11 बजे बक्सर पहुंची. स्टेशन प्रबंधक रजत सक्सेना के निर्देश पर डॉ. हरिओम पाठक अपने सहयोगियों के साथ संबंधित कोच में पहुंचे. चिकित्सकीय टीम ने तत्काल स्थिति संभाली और ट्रेन की बोगी में ही सुरक्षित प्रसव कराया. महिला ने स्वस्थ शिशु को जन्म दिया. इसके बाद मां और नवजात को जरूरी प्रारंभिक चिकित्सकीय सेवाएं दी गईं.
घर जाने की इच्छा पर दी गई जरूरी सलाह
प्रसव के बाद चिकित्सक ने महिला और उनके पति को सलाह दी कि वे बेहतर देखभाल और निगरानी के लिए बक्सर में उतरकर आगे का इलाज कराएं. हालांकि, दंपती ने घर जाने की इच्छा जताई. इसके बाद उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय सहायता और सलाह देकर ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया. इस दौरान ट्रेन को बक्सर स्टेशन पर करीब आधे घंटे तक रोका गया.
डॉ. हरिओम पाठक ने बताया कि ट्रेन में जन्म लेने वाले शिशु को रेलवे के नियमानुसार वयस्क होने तक ट्रेन में यात्रा के लिए पास दिए जाने का प्रावधान है. महाअष्टमी के दिन रेलवे चिकित्सक और अधिकारियों की तत्परता से एक परिवार के लिए यह सफर यादगार बन गया.




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