बक्सर में पोर्टेबल दुकानों के आवंटन पर रार: कार्यपालक पदाधिकारी और वार्ड पार्षदों में ठनी ..

एक तरफ कार्यपालक पदाधिकारी इसे शहर के सौंदर्यीकरण और वेंडर्स के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों और पार्षदों ने बोर्ड को अंधेरे में रखने, मनमानी कार्यशैली और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.




               




  • प्रशासन का दावा: 'वन स्ट्रीट वन प्रोडक्ट' से वेंडर्स को मिलेगा स्थायी ठिकाना, सुधरेगा शहर का स्वरूप
  • पार्षदों का आरोप: बोर्ड को अंधेरे में रख ₹10 में बांटे जा रहे फॉर्म, न जगह तय न तय हुई लागत

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर परिषद क्षेत्र में फुटपाथी दुकानदारों और बेरोजगारों को सुव्यवस्थित करने के लिए शुरू की गई 'पोर्टेबल शॉप' योजना को लेकर नगर प्रशासन और वार्ड पार्षदों के बीच सीधा टकराव शुरू हो गया है. एक तरफ कार्यपालक पदाधिकारी इसे शहर के सौंदर्यीकरण और वेंडर्स के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों और पार्षदों ने बोर्ड को अंधेरे में रखने, मनमानी कार्यशैली और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

आमने-सामने: मुख्य मुद्दे और दोनों पक्षों का रुख

मुद्दाकार्यपालक पदाधिकारी (प्रशासन का पक्ष)वार्ड पार्षद (जनप्रतिनिधियों का पक्ष)
योजना की स्वीकृतिप्रशासनिक स्तर पर शहर को व्यवस्थित करने और मुख्य सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के उद्देश्य से पहल की गई है.बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति की बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई. निर्वाचित प्रतिनिधियों की सहमति के बिना एकतरफा कार्यालय आदेश जारी किया गया.
सर्वेक्षण और डेटासिटी मिशन मैनेजर और स्वच्छता पदाधिकारियों द्वारा जीपीएस मैपिंग, फोटो और आधार के जरिए दुकानदारों का वास्तविक सर्वे कराया जा रहा है.सर्वे का कोई भी ब्लूप्रिंट या चिह्नित दुकानदारों का आधिकारिक आंकड़ा पार्षदों को उपलब्ध नहीं कराया गया.
दुकान की लोकेशन व संख्या'वन स्ट्रीट, वन प्रोडक्ट' के आधार पर सड़कें चिन्हित होंगी. जमीन का नक्शा तैयार कर वेंडिंग जोन और स्ट्रीट तय किए जा रहे हैं.दुकानें कहां रखी आ0जाएंगी और कुल संख्या कितनी होगी, यह स्पष्ट नहीं है. बिना लोकेशन बताए ₹10 में फॉर्म बेचना जनता को गुमराह करना है.
लागत व आवंटन शर्तपीएम स्वनिधि के लाभार्थियों को वरीयता मिलेगी, इसके बाद बची दुकानों को आम लोगों में 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर बांटा जाएगा.दुकान की अंतिम लागत या मासिक किराया क्या होगा, इसका कोई उल्लेख नहीं है. 'पहले आओ, पहले पाओ' की आड़ में रसूखदारों को लाभ मिलने की आशंका है.
शहरी ढांचा व यातायातसड़कों के फ्लैंक पर दुकानें लगने से ठेले हटेंगे, जिससे जाम की समस्या घटेगी और शहर एकरूप नजर आएगा.पहले से जाम झेल रहे शहर में 8×10 फीट की दुकानें नाले और फुटपाथ पर रखने से नालों की सफाई बाधित होगी और यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी.

कार्यपालक पदाधिकारी: 'शहर को सुंदर और वेंडर्स को स्थायी ठिकाना देना लक्ष्य' प्रशासन का कहना है कि शहर की सड़कों को जाममुक्त और सुंदर बनाने के लिए 10×8 फीट (80 वर्ग फीट) की मजबूत प्री-फैब्रिकेटेड कंटेनर दुकानें तैयार कराई गई हैं, जो 35 से 40 साल तक सुरक्षित रहेंगी. इनमें बिजली, चिमनी, सौर ऊर्जा और सेंट्रलाइज्ड वाटर सप्लाई जैसी सुविधाएं दी जाएंगी. 'वन स्ट्रीट, वन प्रोडक्ट' के तहत फल-सब्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी दुकानों के लिए अलग-अलग स्ट्रेच तय किए जा रहे हैं. प्रशासन का तर्क है कि पीएम स्वनिधि के लाभार्थियों को प्राथमिकता देते हुए पारदर्शिता के साथ डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि फुटपाथी दुकानदारों को सम्मानजनक आजीविका मिल सके.

वार्ड पार्षद: 'बिना तैयारी और बिना बोर्ड सहमति के ₹10 की वसूली' सशक्त स्थायी समिति के सदस्य इंद्र प्रताप सिंह (बबन सिंह), राजू राय (झब्बू राय), मनोज कुमार गुप्ता, दिलीप कुमार और अंजू देवी का कहना है कि नगर प्रशासन मनमाने फैसले ले रहा है. पार्षदों का तर्क है कि जब तक बोर्ड में दुकानों की लागत, आवंटन दर, स्थान और नियमों का निर्धारण नहीं हुआ, तब तक आवेदन प्रक्रिया शुरू करना नियम विरुद्ध है. जनप्रतिनिधियों का कहना है कि किला मैदान के पीछे और तय वेंडिंग जोन में वेंडर्स को बसाने का पुराना बोर्ड प्रस्ताव अब तक अधर में लटका है. ऐसे में बिना आधारभूत ढांचे के अचानक नई योजना थोपने से जनता उनसे सवाल कर रही है और उनके पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.

नगर परिषद कार्यालय में 10 रुपये का फॉर्म खरीदकर दुकान पाने की आस में बेरोजगारों और छोटे व्यापारियों की लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन प्रशासन की तत्परता और जनप्रतिनिधियों के तीखे विरोध के बीच योजना के क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर संशय बना हुआ है.











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