वर्ष 2016-17 से लंबित पांच लाख रुपये के पुनर्वास अनुदान (आरजी) का 10 वर्षों के ब्याज सहित भुगतान करने की मांग उठाई. साथ ही एनटीपीसी की नीति और नवीनगर प्लांट की तर्ज पर भूमि की उत्पादकता के आधार पर चौसा के किसानों को फसल वार्षिकी देने की मांग की गई.
- बनारपुर की महापंचायत में सांसद सुधाकर सिंह की मौजूदगी में गूंजा किसानों का हक, पुनर्वास अनुदान, रोजगार और मजदूरी भुगतान को लेकर प्रबंधन पर दबाव
- मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकाल के लिए बंद कराया जाएगा प्लांट का काम, 2016-17 से लंबित पांच लाख रुपये के पुनर्वास अनुदान पर ब्याज सहित भुगतान की मांग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : चौसा थर्मल पावर प्लांट से प्रभावित किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है. वर्षों से लंबित मुआवजे, पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी मांगों को लेकर किसानों ने आंदोलन तेज करने का फैसला किया है. बुधवार को बनारपुर पंचायत भवन में आयोजित प्रभावित किसान-खेतिहर मजदूर मोर्चा की महापंचायत में साफ अल्टीमेटम दिया गया कि 30 नवंबर 2026 तक मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो एसटीपीएल पावर प्लांट का संपूर्ण कार्य शांतिपूर्ण तरीके से अनिश्चितकाल के लिए बंद कराया जाएगा. महापंचायत में सांसद सुधाकर सिंह भी शामिल हुए.
सभा की अध्यक्षता रामनारायण राय ने की, जबकि मंच संचालन अश्विनी कुमार चौबे ने किया. मुख्य अतिथि के रूप में सांसद सुधाकर सिंह के साथ दिनेश सिंह और अशोक सिंह उपस्थित रहे. सभा में सर्वसम्मति से प्रभावित किसानों और मजदूरों के सभी लंबित देय लाभों का भुगतान कराने का प्रस्ताव पारित किया गया.
10 साल का ब्याज और फसल वार्षिकी की मांग
किसानों ने वर्ष 2016-17 से लंबित पांच लाख रुपये के पुनर्वास अनुदान (आरजी) का 10 वर्षों के ब्याज सहित भुगतान करने की मांग उठाई. साथ ही एनटीपीसी की नीति और नवीनगर प्लांट की तर्ज पर भूमि की उत्पादकता के आधार पर चौसा के किसानों को फसल वार्षिकी देने की मांग की गई. स्थानीय लोगों को रोजगार देने, पावर मेक ठेका एजेंसी के माध्यम से होने वाली कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने और स्थायी रिक्तियों का विज्ञापन जारी करने की भी मांग की गई.
मजदूरों को 1000 दिनों की मजदूरी और विस्थापितों को मिले आवास
महापंचायत में भूमिहीन मजदूरों और पौनी-पारंपरिक कारीगरों को भू-अर्जन अधिनियम 2013 के तहत 1000 दिनों की मजदूरी (एमएडब्ल्यू) का भुगतान कराने के लिए आधिकारिक प्रारूप जारी करने की मांग की गई. इसके अलावा भू-दाता किसानों को सूचना पासबुक देने, विस्थापित परिवारों को आवासीय भूखंड आवंटित करने और प्रभावित गांवों में किसान भवन का निर्माण पूरा कराने पर जोर दिया गया.
पटना स्थित एलएआरए कोर्ट में वर्ष 2016 से लंबित मामलों में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, बक्सर से तत्काल प्रतिउत्तर दाखिल कराने की मांग भी उठी. सांसद की सरपरस्ती में प्रशासन, कंपनी अधिकारियों और मोर्चा प्रतिनिधियों के बीच त्रिपक्षीय समीक्षा बैठक कराने का निर्णय लिया गया.
महापंचायत को बृजेश राय, जय मंगल पांडेय, नरेंद्र तिवारी, सुरेश सिंह, ममता देवी, रामप्रवेश सिंह, मुन्ना तिवारी, शैलेश राय, पीयूष कुमार सिंह, हरिश्चंद्र प्रसाद, भोला सिंह, अजय सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया.







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