युवा संसद में बक्सर के पवन उपाध्याय का जलवा, दूसरी बार मिला प्रथम पुरस्कार ..

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में यह उनकी दूसरी बड़ी सफलता है. इससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में विद्यार्थी रहते हुए पवन प्रधानमंत्री की भूमिका के लिए भी प्रथम पुरस्कार जीत चुके हैं.

 




               





  • प्रधानमंत्री के बाद अब नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में मारी बाजी
  • बावनबांध गांव के पवन ने राष्ट्रीय मंच पर चमकाया नाम, मां के संकल्प को बताया सफलता की प्रेरणा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : गांव की गलियों से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाले बक्सर के पवन उपाध्याय ने एक बार फिर जिले का मान बढ़ाया है. राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित 18वीं युवा संसद में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की भूमिका के लिए प्रथम पुरस्कार हासिल किया है. भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में यह उनकी दूसरी बड़ी सफलता है. इससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में विद्यार्थी रहते हुए पवन प्रधानमंत्री की भूमिका के लिए भी प्रथम पुरस्कार जीत चुके हैं.

बक्सर जिले के बावनबांध गांव के निवासी पवन उपाध्याय वर्तमान में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी विषय के शोधार्थी हैं. युवा संसद में अलग-अलग भूमिकाओं में दो बार प्रथम पुरस्कार हासिल करना उनकी उपलब्धि को खास बनाता है. पहले प्रधानमंत्री और अब नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाकर उन्होंने संसदीय प्रक्रिया की समझ और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है.

लोकतंत्र में पक्ष-विपक्ष दोनों की अहमियत

अपनी सफलता पर पवन ने कहा कि अवसर व्यक्ति को अनुभव प्रदान करते हैं और भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती पक्ष-विपक्ष, दोनों की मौजूदगी में है. उन्होंने अपने व्यक्तित्व और वैचारिक विकास में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की भूमिका का भी उल्लेख किया. उनके अनुसार, संगठन से मिले अनुशासन, विभिन्न गतिविधियों में भागीदारी और अवसरों ने आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता तथा जिम्मेदारी का भाव विकसित करने में मदद की.

मां के संकल्प को साकार करने का सफर

पवन ने अपनी शैक्षणिक यात्रा और उपलब्धियों का श्रेय अपनी मां के दृढ़ संकल्प को भी दिया. उन्होंने कहा कि गांव से केंद्रीय विश्वविद्यालय तक का सफर उनकी मां के सपने और संकल्प को साकार करने की यात्रा है. उनकी इस बात से सफलता के पीछे परिवार के संघर्ष और सहयोग की अहमियत भी सामने आती है.

ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले पवन की उपलब्धि से बावनबांध गांव सहित पूरे बक्सर जिले में खुशी का माहौल है. उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं. पवन की उपलब्धि बताती है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन, निरंतर अभ्यास और मिले अवसरों का सही इस्तेमाल कर सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है.











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