वेतन किस आधार पर और किसके आदेश से रोका गया था, इसे लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सोनू कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
- 11 माह की सेवा में सिर्फ तीन माह का वेतन मिलने का किया था दावा, प्रशासन ने जारी किया बकाया भुगतान
- आरडीओ की कथित अनधिकृत अनुपस्थिति की भी होगी जांच, वेतन रोकने के आधार पर बीडीओ से मांगा जवाब
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : आठ माह से वेतन नहीं मिलने पर ब्रह्मपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में कटोरा लेकर धरने पर बैठीं ग्रामीण विकास पदाधिकारी (आरडीओ) अल्पिका सिंह के मामले में जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है. प्रशासन ने उनका लंबित वेतन जारी कर दिया है. वहीं, वेतन किस आधार पर और किसके आदेश से रोका गया था, इसे लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सोनू कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया है. इस कार्रवाई के बाद ब्रह्मपुर प्रखंड कार्यालय में बीडीओ और आरडीओ के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है.
आरडीओ अल्पिका सिंह ने धरने के दौरान दावा किया था कि करीब 11 महीने की सेवा अवधि में उन्हें महज तीन महीने का ही वेतन मिला है, जबकि आठ महीने का भुगतान लंबित है. नियमित रूप से विभागीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद वेतन नहीं मिलने से उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. इसी के विरोध में वह दो दिनों तक कटोरा लेकर प्रखंड कार्यालय परिसर में धरने पर बैठी थीं.
सोशल मीडिया पर खबरें आने के बाद प्रशासन ने लिया संज्ञान
जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर आरडीओ के आठ माह का वेतन लंबित रहने से संबंधित खबरें प्रसारित होने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मी का वेतन नियमानुसार और सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बिना रोकना उचित नहीं है. इसी के मद्देनजर संबंधित आरडीओ का लंबित वेतन जारी कर दिया गया है.
बीडीओ से पूछा गया वेतन रोकने का आधार
प्रशासन ने बीडीओ सोनू कुमार से स्पष्टीकरण मांगा है कि संबंधित पदाधिकारी का वेतन किस आधार पर और किस सक्षम प्राधिकार के आदेश से रोका गया था. इसके साथ ही बीडीओ के प्रतिवेदन के आलोक में आरडीओ की कथित अनधिकृत अनुपस्थिति की भी जांच कराई जाएगी. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर विभागीय नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
गौरतलब है कि अल्पिका सिंह इससे पहले बीडीओ सोनू कुमार पर मानसिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार और कार्यालयीन सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगा चुकी हैं. इस संबंध में उन्होंने डीएम, डीडीसी, डुमरांव एसडीओ के साथ ग्रामीण विकास विभाग के सचिव और मंत्री स्तर तक लिखित शिकायत की थी. उन्होंने बार-बार स्पष्टीकरण जारी करने, अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से अपना पंजीकरण हटाने जैसे आरोप भी लगाए थे.
लगातार शिकायतों और विभागीय पत्राचार के बाद उन्हें प्रखंड कार्यालय परिसर में आवास और बैठने के लिए चेंबर उपलब्ध कराया गया था. हालांकि, वेतन भुगतान का मामला लंबित रहने के कारण विवाद जारी था. अब जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद बकाया वेतन जारी हो गया है, लेकिन आरडीओ की कथित अनधिकृत अनुपस्थिति और वेतन रोकने के निर्णय को लेकर जांच आगे बढ़ेगी.







.png)








0 Comments