ताले में कैद 'लाखों की मशीनें', दर-दर भटकने को मजबूर मरीज: डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल के खिलाफ फूटा आक्रोश ..

जरूरतमंद मरीजों को फिजियोथैरेपी के लिए निजी क्लीनिकों या दूसरे जिलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के भीतर लाखों रुपये के उपकरण तालों के पीछे सड़ रहे हैं. 





               





  • फिजियोथैरेपिस्ट नदारद, स्टोर रूम में धूल फांक रहे आधुनिक उपकरण
  • स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ आर-पार की जंग शुरू

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : अस्पताल के भंडार गृह में बंद लाखों की चमचमाती मशीनें और बाहर दर्द से कराहते बेबस मरीज—डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल की यह कड़वी हकीकत सरकारी स्वास्थ्य दावों की हवा निकाल रही है. एक तरफ जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को फिजियोथैरेपी के लिए निजी क्लीनिकों या दूसरे जिलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल के भीतर लाखों रुपये के उपकरण तालों के पीछे सड़ रहे हैं. अस्पताल प्रशासन की इस बेरुखी के खिलाफ सूचना अधिकार (RTI) कार्यकर्ता हरे कृष्ण यादव के नेतृत्व में अस्पताल परिसर में जोरदार धरना जारी है.

धरना स्थल पर जुटे वक्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन को आड़े हाथों लेते हुए सवाल दागा कि जब सरकार ने आम जनता के इलाज के लिए संसाधन और मशीनें मुहैया कराई हैं, तो फिर उन्हें मरीजों की पहुंच से दूर क्यों रखा गया है? मरीजों को रेफर करने का खेल कब बंद होगा?

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें:

  • भंडार गृह का अविलंब निरीक्षण: अस्पताल के स्टोर रूम की तत्काल जांच कराई जाए और वहां बंद पड़ी फिजियोथैरेपी से जुड़ी सभी आधुनिक मशीनों को फौरन चालू कराया जाए.
  • नियमित सेवा की बहाली: अनुमंडलीय अस्पताल में ही प्रशिक्षित फिजियोथैरेपिस्ट की नियमित सेवा सुनिश्चित की जाए, ताकि स्थानीय लोगों को फिजियोथैरेपी के लिए बाहर न भटकना पड़े.
  • प्रशासनिक कार्रवाई: स्वास्थ्य महकमे के वरीय अधिकारी और जिला प्रशासन मामले में खुद संज्ञान लेते हुए इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाए.

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिला समर्थन

स्वास्थ्य व्यवस्था की इस लचर कार्यशैली के खिलाफ अब आम जनता के साथ-साथ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी एकजुट हो गए हैं. धरने में सामाजिक मंच के संयोजक एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (डुमरांव) के पूर्व प्रत्याशी प्रदीप कुमार शरण, जिला पार्षद प्रतिनिधि विजेन्द्र पाल, पंचायत समिति सदस्य हरेंद्र यादव, लाखनडिहरा के पूर्व मुखिया संतोष कुमार, आरटीआई कार्यकर्ता ददन सिंह, ललन यादव, धर्मेंद्र यादव और रंगलाल यादव सहित कई स्थानीय लोग डटे हुए हैं.

प्रदर्शनकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बंद मशीनों को चालू कर मरीजों को फिजियोथैरेपी की सुविधा नहीं दी गई, तो यह आंदोलन अस्पताल परिसर से निकलकर व्यापक जन-आंदोलन का रूप लेगा.











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