जीवंत हुआ भ्रातृ-प्रेम : 150 साल पुरानी परंपरा की साक्षी बनी हजारों की भीड़, राम-भरत मिलन देख नम हुईं आंखें ..

20 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन यमुना चौक पर भरत मिलाप के साथ होता है. वर्ष 1885 से निरंतर चली आ रही इस परंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में स्थानीय बुजुर्गों, युवाओं और समिति के सदस्यों की अहम भूमिका रही है.



               




  • बक्सर के जमुना चौक पर रावण वध के बाद भरत मिलाप का भव्य मंचन, एसडीएम और डीएसपी ने फीता काटकर किया शुभारंभ
  • वृंदावन के कलाकारों के सजीव अभिनय से भावविभोर हुए श्रद्धालु; पुलिस-प्रशासन की मुस्तैदी के बीच समिति ने की परंपरा सहेजने की मार्मिक अपील

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : विजयादशमी के पावन अवसर पर रावण वध के बाद बक्सर का ऐतिहासिक 'जमुना चौक' एक बार फिर त्याग, मर्यादा और अटूट भ्रातृ-प्रेम का साक्षी बना. करीब डेढ़ सदी पुरानी परंपरा को सहेजते हुए आयोजित 'भरत मिलाप' समारोह में जैसे ही 14 वर्ष के वनवास के बाद प्रभु श्री राम और उनके अनुज भरत गले मिले, चौक पर मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की आंखें छलक पड़ीं. पूरा वातावरण 'जय श्री राम' और 'सियावर रामचंद्र की जय' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा.

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सदर एसडीएम अविनाश कुमार और डीएसपी गौरव पांडेय ने फीता काटकर किया. इस ऐतिहासिक दृश्य को देखने के लिए शहर के कोने-कोने से महिला, पुरुष और बच्चों का हुजूम उमड़ पड़ा.

1885 से अनवरत जारी है 150 वर्षों की गौरवशाली परंपरा

बक्सर में रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि इस प्राचीन नगर की सांस्कृतिक आत्मा है. ऐतिहासिक किला मैदान में श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन यमुना चौक पर भरत मिलाप के साथ होता है. वर्ष 1885 से निरंतर चली आ रही इस परंपरा को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में स्थानीय बुजुर्गों, युवाओं और समिति के सदस्यों की अहम भूमिका रही है.

वृंदावन के कलाकारों का सजीव अभिनय और मनमोहक झांकियां

समारोह में वृंदावन से पधारे पवन कृष्ण ठाकुर और उनकी नाट्य मंडली द्वारा प्रस्तुत प्रसंगों ने जनमानस को मंत्रमुग्ध कर दिया. भरत जी की विरह-वेदना और प्रभु श्री राम के चरणों में उनके समर्पण के मंचन ने दर्शकों को भाव-विह्वल कर दिया. इसके साथ ही भगवान नृसिंह अवतार सहित निकाली गई मनमोहक धार्मिक झांकियों ने आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए.

कलाकारों ने बक्सर को महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और प्रभु राम की शिक्षास्थली बताते हुए युवा पीढ़ी से मोबाइल की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर बुजुर्गों के संस्कारों और माता-पिता की सेवा से जुड़ने का आह्वान किया.

प्रशासनिक सजगता: सप्तमी से दशमी तक रातभर संभाली कमान

दशहरा, दुर्गा पूजा और भरत मिलाप को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में जिला और पुलिस प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही. एसडीएम अविनाश कुमार, डीएसपी गौरव पांडे और नगर थाना प्रभारी मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक टीमें पूरी तरह मुस्तैद रहीं. अधिकारियों ने बताया कि सप्तमी से विजयादशमी तक पुलिस और प्रशासन के अधिकारी शाम से भोर 4 बजे तक सड़कों पर गश्त करते रहे, जिससे लाखों श्रद्धालु सुरक्षित माहौल में उत्सव का आनंद ले सके. उत्कृष्ट कार्यशैली के लिए रामलीला समिति ने प्रशासनिक पदाधिकारियों के नागरिक सम्मान की घोषणा की.

त्याग की अमर सीख और विरासत सहेजने का आह्वान

मंच से वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जहां संपत्ति और स्वार्थ के लिए विवाद आम हैं, वहां भरत जी का त्याग संपूर्ण मानवता के लिए अनुकरणीय है. बड़े भाई की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर 14 वर्षों तक राजकाज संभालना सच्चे भ्रातृ-प्रेम का अद्वितीय उदाहरण है.

वहीं, रामलीला समिति के पदाधिकारियों ने इस ऐतिहासिक आयोजन के संचालन में आ रहे आर्थिक संकट को साझा करते हुए भावुक अपील की. उन्होंने कहा कि 1885 से पूर्वजों द्वारा स्थापित इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखना पूरे बक्सर का दायित्व है. समिति ने नगरवासियों से दिल खोलकर सहयोग करने का अनुरोध किया, ताकि यह परंपरा भविष्य में भी अनवरत प्रवाहित होती रहे.










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