कैलाशपति मिश्र की पुण्यतिथि पर छलका पूर्व विधायक दिलमणि देवी का दर्द, मंच से उठाए टिकट वितरण पर सवाल ..

कहा कि चुनाव के समय बार-बार आश्वस्त किया जाता है कि आप तैयारी में लगी रहिए, आपका नाम तय है. यहां तक कि रात 12 बजे फोन कर कहा जाता है कि पूरी तरह बेफिक्र रहिए, टिकट फाइनल हो चुका है. लेकिन अंतिम समय में न जाने कहां से नए चेहरे सामने आ जाते हैं





               




  • बोलीं— रात 12 बजे तक टिकट फाइनल होने का दिलाते रहे भरोसा, फिर ऐन वक्त पर कटा पत्ता
  • क्षेत्र की जनता पूछती है चुप्पी पर सवाल, दलगत अनुशासन के आगे बेबस होने की कही बात

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : भाजपा के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की पुण्यतिथि समारोह के मंच पर उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब पूर्व विधायक दिलमणि देवी की पीड़ा सार्वजनिक रूप से सामने आ गई. मंच पर मौजूद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के सामने उन्होंने चुनाव में टिकट वितरण और नेताओं की वादाखिलाफी को लेकर खुलकर अपनी बात रखी.

नेताओं के पुराने वादों का जिक्र करते हुए दिलमणि देवी ने कहा कि पहले नेताओं ने उनसे वादा किया था कि यदि ब्रह्मपुर से टिकट नहीं मिला, तो वे अपनी सीट छोड़कर भी उन्हें मैदान में उतारेंगे. उन्होंने मंच से पूछा कि क्या किसी को यह बात याद है? लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जब चुनाव का वक्त आता है, तो सारे वादे भुला दिए जाते हैं.

टिकट बंटवारे के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के समय बार-बार आश्वस्त किया जाता है कि आप तैयारी में लगी रहिए, आपका नाम तय है. यहां तक कि रात 12 बजे फोन कर कहा जाता है कि पूरी तरह बेफिक्र रहिए, टिकट फाइनल हो चुका है. लेकिन अंतिम समय में न जाने कहां से नए चेहरे सामने आ जाते हैं और टिकट किसी और के हाथ में चला जाता है.

दिलमणि देवी ने कहा कि जब वे क्षेत्र में जाती हैं, तो जनता और समर्थक सीधे सवाल करते हैं कि वे टिकट क्यों नहीं ला सकीं और चुप क्यों बैठी हैं. उन्होंने लाचारी जताते हुए कहा कि पार्टी के फैसले के आगे वे कुछ नहीं कर पातीं और दल के अनुशासन से बंधी होने के कारण विरोध भी नहीं जता सकतीं.

भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि आज बाबूजी (कैलाशपति मिश्र) की पुण्यतिथि है, इसलिए वे इस मौके पर कोई विवाद नहीं चाहतीं, लेकिन दिल में जो दर्द है वह छुप नहीं पाता. अंत में उन्होंने कैलाशपति मिश्र को नमन करते हुए 'बाबूजी अमर रहें' के नारे लगाए और लोगों से हर साल उनका आशीर्वाद लेने की अपील की. उनके संबोधन के तुरंत बाद मंच संचालक ने स्थिति संभालते हुए सत्तारूढ़ दल के मुख्य सचेतक संजीव चौरसिया को अगले वक्ता के रूप में आमंत्रित किया.










Post a Comment

0 Comments